UTTARAYANA

उत्तरायण एक संघ की एक परिकल्पना है जिसकी शुरुआत एक छोटे से ग्रुप से की जा रही है । कहना जरूरी नहीं है कि इस संगठन का संचालन इसके सदस्यों के सक्रिय सहयोग से ही हो सकेगा

सबसे पहले निवेदन पूर्वक मेरा निमंत्रण है आपके लिए कि आप इस संगठन से जुड़िए – इस संगठन के संस्थापक मंडल के सदस्य बनिए और इस शोध में हमारे साथ होइए कि

जीवन के उत्तरार्ध में व्यक्ति की या कहें सदस्यों के शेष जीवन में खुशहाली कैसे लाई जा सकती है?

शेष जीवन को फिर से खुशहाल कैसे बनाया जा सकता है ? इसके लिए पुनः आपको मेरा सादर निमंत्रण है।

ऐसा माना जाता है कि अगर अच्छे लोगों का साथ हो और दिल से साथ हो तो केवल यह साथ होना भी जीवन में वास्तविक खु शी उत्पन्न करता है । इसलिए आइए “पहले केवल साथ होने से खुशी पाने के लिए – साथ होना शुरू करते हैं ।” आगे

आइए इस विषय पर मिलकर शोध करते हैं कि

जो भी व्यक्ति सहयोग एवं संगठन में विश्वास करते हैं उनका स्वागत है उम्र चाहे कोई भी हो किंतु उत्तरायण नाम के इस संगठन में 50 वर्ष उमरा अथवा उससे अधिक उम्र के व्यक्ति इस संगठन के नियमित सदस्य माने जाएंगे (कुछ शर्तों के अनुसार) कैसा तथा सीनियर सिटीजन इस संगठन की सम्मानित सदस्य माने जाएंगे (कुछ शर्तौ के आधार पर)

संगठन का उद्देश्य निम्नलिखित बिंदुओं पर शोध करने करना होगा मैं कहना चाहता हूं कि साथ मिल विचार कर तथा चर्चा करके इस निर्णय पर पहुंचा जाएगा कि कि इस संगठन की कैसे इतना सशक्त बनाया जाए कि

1 जीवन के उत्तरायण में खुशी कैसे प्राप्त की जा सकती है

2. उत्तरायण में एक व्यक्ति एवं यह संस्था समाज को ए1कनई दिशा दिखाने में कैसे सक्षम हो सकेगा ?

3. समाज में नीति धर्म एवं अनुशासन को पुनर्स्थापित कैसे किया जा सकता है

स्पष्ट शब्दों में यह संगठन अपनी सदस्यों की खुशहाली के मार्ग की तलाश करेगा और साथ ही इस विषय पर भी शोध करेगा कि जीवन में समाज में कैसे खुशियां उत्पन्न की जा सकती है ?

अंत में मुझे विशेष रूप से यह कहना है कि

@ हम सभी लोग जीवन के पूर्वार्ध में तो अकेले ही होते रहे और अपने मन का करते रहे कुछ खोया भी बहुत कुछ पाया कह सकते हैं कि जीवन के खट्टे मीठे अनुभव साथ लेकर हम अपने जीवन के उत्तरण में आ गए हैं

@ आज के बाद जीवन में एक मोड़ लाना है यानी बातचीत करते हैं + विचारों को साझा करते हैं + उन पर चर्चा करते हैं + एक सामूहिक शक्ति कलेक्टिव निर्णय लिया जाए और उसको जिया जाए जिया जाए।

यह चर्चा यहीं समाप्त होती है

वैसे हमें आपका इंतजार रहेगा

धन्यवाद

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